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दुष्टों के संहार के लिए अवतरित होते है भगवान

दुष्टों के संहार के लिए अवतरित होते है भगवान

फोटो : कथा का रसपान कराते कथावाचक श्रीदास महाराज

 

दुदही
तमकुहीराज
श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन विश्व विख्यात कथावाचक महर्षि श्री दास जी महाराज ने श्री कृष्ण जन्म की कथा का रसपान कराया। व्यास जी ने कहा कि- यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ,अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं, परित्राणाय साधुनाम संभवामि युगे युगे। अर्थात जब जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है और अधर्म अपना विस्तार बढ़ाने लगता है उस दौरान भगवान दुष्टों के संहार के लिए पृथ्वी पर अवतार लेते हैं। भगवान का अवतार दुष्टों को अच्छा नहीं लगता है। और दुष्ट नाना प्रकार का उपद्रव करते हैं। श्रीदास जी ने कथा के क्रम में कहा कि महाराज उग्रसेन के पुत्र कंस इसी प्रकार का अत्याचारी था। और जब आकाशवाणी सुनता है कि देवकी के अष्टम गर्भ से उत्पन्न बालक के हाथों उसकी मृत्यु होगी तो देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल कर नाना प्रकार की यातनाएं देता है। लेकिन परमात्मा के सामने उस दुष्ट की सारी हेकड़ी धरी की धरी रह जाती है। भगवान का जन्म होता है और देवता आकाश से पुष्प वर्षा करते हैं।पांचवें दिन की कथा का शुभारंभ यजमानों के द्वारा व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक श्री दास जी महाराज जी का माल्यार्पण और अर्चन पूजन से हुआ। इस दौरान जन्मोत्सव की सुंदर झांकी सजाई गई। जिसमें भक्तों ने नृत्य करके भगवान के जन्म का उत्सव मनाया। पांचवें दिन की कथा के मुख्य अतिथि थाना थाना बिशुनपुरा के उपनिरीक्षक अखिलेश कुमार राय रहे।
इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं सहित कथा कमेटी के संरक्षक कन्हैया कुमार मिश्र, संयोजक कामाख्या नारायण मिश्र, अध्यक्ष शिव शंकर कुशवाहा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष व विश्व सनातन धर्म संस्था के जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, उपाध्यक्ष पारसनाथ जायसवाल, कोषाध्यक्ष अमेरिका गुप्ता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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