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205वर्षो से फुलझरिया का दक्षिणेश्वरी काली मंदिरआस्था का केंद्र है बना

205वर्षो से फुलझरिया का दक्षिणेश्वरी काली मंदिरआस्था का केंद्र है बना

शेखर की रिपोर्ट।

 

दुगदा : चंद्रपुरा प्रखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित दुगदा पूर्वी पंचायत के फुलझरिया बस्ती में विगत 205 वर्षो से मां काली की पूजा की जा रही है। पूजा को लेकर फुलझरिया ही नहीं बल्कि आसपास गांव में धार्मिक माहौल रहता है। यहां हर रोज सैकड़ों भक्त पूजा अर्चना के लिए आते हैं। मां काली पूजनोत्सव का समय आते ही गांव की रौनक बढ़ जाती है। पूजनोत्सव में दुगदा ही नहीं बल्कि बोकारो, धनबाद, बेरमो से श्रद्धालु आते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले मां काली पूजनोत्सव में भक्तजनों का उत्साह देखते बनता है। काली पूजा के दिन हजारों की संख्या में यहां श्रद्धालुओं का आगमन होता है। पूजा प्रारंभ होने के पूर्व बड़का तालाब से बारी लाने की प्रथा है। पुजारी द्वारा एक मिट्टी के घड़े में पानी लाया जाता है। महज आधा किलोमीटर दूर से पुजारी को आने में दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पुजारी पर मां सवार हो जाती है और वह मंदिर आना नहीं चाहती है। मां को मंदिर ले जाने के दौरान ढोल, नगाड़ा, तलवार, गंडासा, मशाल आदि का प्रयोग किया जाता है। उस वक्त पुजारी भी नृत्य करते हैं। इसके बावजूद घड़े से पानी कम नहीं होता। हजारीबाग नरेश कामाख्या नारायण सिंह ने की थी मंदिर की स्थापना : मंदिर के पुजारी पंचानन चक्रवर्ती, गोपाल चक्रवर्ती, वृंदावन चक्रवर्ती आदि ने बताया कि करीब 200 वर्ष पूर्व हजारीबाग नरेश कामाख्या नारायण सिंह दक्षिणेश्वरी काली को (काली स्थान की मिट्टंी) कोलकाता से हजारीबाग ले जा रहे थे। बोकारो जिले के सीमावर्ती क्षेत्र दुगदा में प्रवेश करने के बाद वे आगे नहीं बढ़ पाए। तब जाकर उन्होंने उसी स्थल पर मां काली को स्थापित कर दिया। वहां एक मंदिर बनाया गया। मिट्टंी के स्वरूप में ही मां की पूजा होने लगी। दिवाली के दिन वहां मिट्टंी की प्रतिमा ही स्थापित कर विशेष पूजन किया जाने लगा। नरेश स्वयं हजारीबाग से साल में एक बार मां काली दक्षिणेश्वरी की पूजा करने आया करते थे। पुजारी ने बताया कि नरेश ने चक्रवर्ती परिवार को पूजन का दायित्व सौंपा। तब से अब तक चक्रवर्ती परिवार मां काली की पूजा करता आ रहा है। इस मंदिर की ख्याति झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल में भी है। दोनों राज्यों से भी लोग वर्ष भर मां के दर्शन एवं पूजन को यहां आते हैं। ऐसे लोग जो कोलकाता नहीं जा पाते थे, इसी मंदिर में मां दक्षिणेश्वरी काली की पूजा किया करते थे। इस वर्ष भी पूजा की तैयारी जोर शोर से की जा रही है।

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