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सरकार की संवेदनहीनता से छात्रों के भविष्य पर खतरा

सरकार की संवेदनहीनता से छात्रों के भविष्य पर खतरा : आयुष

धर्मेन्द्र कुमार कन्नौजिया

समाजवादी छात्र सभा के जिला उपाध्यक्ष आयुष तिवारी ने वर्तमान में छात्र-छात्राओं के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होने कहॉ कि एक तरफ सरकार छात्रों के लिए खुद को हितकारी बताती हैं वहीं दूसरी तरफ उनके भविष्य के लिए लिए जा रहे फैसलों पर दृढ़ता से खड़ी होती नहीं दिख रही है। कोरोना की पहली लहर में सरकार ने स्नातक के प्रथम, द्वितिय व परास्नातक के प्रथम वर्ष के छात्रों की परिक्षा रद्द कर उन्हें प्रोन्नति कर दिया था।जबकि दूसरी लहर में सरकार और विश्वविद्यालयों के बीच सामंजस्य बैठता नहीं दिख रहा।पहले सरकार कहती है कि स्नातक प्रथम, द्वितिय वर्ष के छात्र प्रोन्नति होंगे, फिर कहते हैं कि द्वितिय वर्ष की परिक्षाएं कराई जाएंगी, तत्पश्चात एक गठित कमेटी की सिफ़ारिश पर ये फैसले लिए गए कि स्नातक प्रथम, द्वितिय वर्ष के छात्रों की परिक्षाएं रद्द की जाती हैं तथा टेस्ट कराकर ये निर्धारित किया जाएगा कि कौन प्रोन्नति होकर अगली कक्षा में जाएगा, लेकिन टेस्ट में मिले नम्बर अंकपत्र पर अंकित नहीं होगा।
छात्र नेता आयुष तिवारी ने बताया कि कोरोना की पहली लहर से दूसरी लहर तक कुशीनगर जनपद के किसी महाविद्यालय को न तो सेनेटाइज किया गया है और न ही कोरोना के संक्रमण से बचने का समुचित उपाय हो पाया है। महाविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय और राज्य सरकार के भरोसे छात्रों को काल की तरफ ढ़केलने पर उतारू है।छात्र प्रतिनिधियों के तरफ से महाविद्यालय प्रशासन को हमेशा से कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतू समुचित उपाय के लिए कहॉ जाता है लेकिन महाविद्यालय प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंगती। राज्य सरकार की संवेदनहीनता के चलते 18+ वर्ष के युवाओं के वैक्सीनेशन में देरी हुई जिसके चलते युवाओं के मन में आक्रोश है।जहॉ सरकार पहली लहर के बाद दूसरी लहर की तैयारी तक नहीं कर पा रहा वहॉ विश्वविद्यालय-महाविद्यालय प्रशासन अपने छात्रों के भविष्य के लिए जो कर रहें हैं वो नाकाफी है। छात्रों के बीच संवाद से ये पता चला कि छात्र खुद परिक्षा देने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हे व उनके परिवार की स्वास्थ सुरक्षा को ताख पर रखकर नहीं।छात्रों में सरकार और विश्वविद्यालय व राज्य सरकार द्वारा टेस्ट के आधार पर प्रोन्नति किए जाने वाले फैसले रोष हैं।छात्रों के मुताबिक अगर हम टेस्ट देते हैं तो हमारे प्राप्तांक अंकपत्र पर अंकित क्यों नहीं किया जाएगा?
श्री तिवारी ने कहा कि सरकार द्वारा किए जा रहे फैसलों से न कि सिर्फ छात्रों में रोष है बल्कि अभिवावकों में भी सरकार के इस फैसले को गलत बताया है।
छात्र नेता आदर्श त्रिपाठी, पंकज कुमार गुप्ता, प्रिंस तिवारी, अर्पित पाण्डेय, आशुतोष सिंह चंदेल, नितेश पाण्डेय आदि ने ‘पहले वैक्सीनेशन, फिर एग्जामिनेशन’ की अपील सरकार, विश्वविद्यालय-महाविद्यालय प्रशासन से की।

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