स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्थान में बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की धूमधाम से की गई पूजा
स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्थान में बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की धूमधाम से की गई पूजा
धर्मेन्द्र कुमार कन्नौजिया
सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश से जीवन को आलोकित करती हैं।- डॉ लखन लाल गुप्ता

तमकुही राज – हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बसंत पंचमी के अवसर पर स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्थान में मां सरस्वती की धूम धाम से पूजा अर्चना किया गया
जिसमें डारेक्टर डॉ लखन लाल गुप्ता प्रधानाचार्य राजन गुप्ता के साथ विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक और बच्चे इस पूजा पाठ में शामिल रहे।
जिसमें मां सरस्वती की पूजा कराने पहुंचे आचार्य राहुल कृष्ण कुंदन ने बताया कि उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। हालाकि उपनिषद व पुराण ऋषियो को अपना अपना अनुभव है, अगर यह हमारे पवित्र सत ग्रंथों से मेल नही खाता तो यह मान्य नही है।
तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।
ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया।




